आदरणीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की विदेश यात्रा

आदरणीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की विदेश यात्रा ने भारत ना जाने कितने विषय पर विदेश नीती पर मजबूत किया है और आर्थिक और वैश्विक स्तर पर एक अलग मक़ाम दिया है। नरेंद्र मोदी जी भी राजनीति में कोई नौसिखिए तो हैं नहीं! गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने देश के अन्य सभी राज्यों की तुलना में न जाने कितनी अधिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। विदेश यात्राओ से हुई कुछ उपलब्धियां इस प्रकार हैं –
1. भाजपा की सरकार ने सऊदी अरब को इस बात के लिये राज़ी किया कि वे क्रूड ऑइल पर “ऑन-टाइम डिलीवरी प्रीमियम चार्ज” न लें – युवा पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान और सुषमा स्वराज ने डील साइन की। इससे देश को हज़ारों करोड़ रुपयों का लाभ हुआ।
2. भूटान में भारत 4 हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर स्टेशन + बाँध के निर्माण करेगा (इन प्रोजेक्ट से भविष्य में होने वाले उत्पादन का बड़ा हिस्सा भारत के हिस्से में आएगा)
3. नेपाल में अबतक के सबसे बड़े बाँध का निर्माण भारत करेगा (चीन इस कार्य को प्राप्त करने के लिये अत्यधिक प्रयास कर रहा था)। भविष्य में उस हाइड्रो पावर स्टेशन से उत्पादित ग्रीन एनर्जी का 83% भाग भारत को प्राप्त होगा।
4. जापान से बेहतर सम्बन्ध बनने के कारण वे डीएमआईसी (दिल्ली-मुंबई इन्वेस्टमेंट कॉरीडोर) में 30 बिलियन डॉलर का निवेश करने के लिये तैयार हो गए हैं। ये राशि वर्तमान विनिमय दर के अनुसार 200,000 करोड रुपए की है।
5. विएतनाम के साथ बेहतर नीतिगत सम्बन्ध बना है। विएतनाम ओएनजीसी-विदेश को तेल के अन्वेषण का अनुबंध देने को तैयार हो गया है। (यूपीए इस कार्य में आगे बढ़ने के लिये ज़रा भी तैयार नहीं थी क्योंकि उन्हें चीन की चिंता थी – और साथ ही, दक्षिण चीनी समुद्र में संघर्ष का डर था)। विदेश नीति के प्रत्येक मामले में यूपीए हमेशा ही पीछे रहा है।
6. अमरीकी प्रतिबन्ध के बावजूद इरान से तेल के आयात में वृद्धि। ईरान रुपये में बेचने के लिये राज़ी हो गया, और इससे हमारे फ़ोरेक्स में बचत हुई, केवल वर्तमान के लिये ही नहीं, बल्कि इससे भविष्य में करेंसी में होने वाली अनियमितताओं से भी भारत की रक्षा हो गयी। भारत को ईरान का “चाबहार” पोर्ट के निर्माण का कार्य भी मिल गया है, जो पकिस्तान को चारों ओर स्थित है। इस पोर्ट में हमारे नेवल शिप की ही पहुँच संभव हो सकेगी।
7. भारत-ऑस्ट्रेलिया (28 वर्ष के बाद नमो पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया का दौरा किया), जबकि ऑस्ट्रेलिया कोयले और यूरेनियम का प्रमुख पूर्तिकर्ता है। नमो टोनी एबट को राज़ी करने में सफल हुए और अब ऑस्ट्रेलिया हमारी ऊर्जा उत्पादन के लिये यूरेनियम की आपूर्ति करेगा।
8. श्रीलंका में चीन के प्रति झुकाव रखने वाले राष्ट्रपति राजपक्षे चुनाव हार गए – याद रखें, यूपीए ने “हम्बंतोता” पोर्ट डेवलपमेंट गँवा दिया था – सीआईए की नवीनतम रिपोर्ट पढ़ें, जिसमें यह संकेत दिए गए हैं कि श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन में रॉ ने प्रमुख भूमिका अदा की। फिर मोदी जी ने श्रीलंका का दौरा भी किया। और, श्रीलंका भी चीन के साथ अपने अनुबंधों से पीछे हटने लगा है और भारतीय प्रोजेक्ट मैनेजरों की ओर हाथ बढ़ा रहे हैं।
9. चीन के साथ, जहाँ व्यापार विनिमय में घाटा बढ़ रहा था, वहाँ भी नमो ने अपना दबाव बनाया। जल्दी ही एंटी-डम्पिंग आएगा जिसके साथ ही चीन जल्दी ही भारत में भारी मात्रा में निवेश करेगा। भारत में 20 बिलियन डॉलर के निवेश के लिये चीन राज़ी हो चुका है। यह लगभग 140,000 करोड रुपए होगा।
10. सुरक्षा के मामले में, मेरे विचार से अजित डोभाल जी को अपने दल में शामिल करने का निर्णय नमो का सर्वोत्तम निर्णय है। पेंटागन, इजरायल और जापान के साथ नवीनतम सहयोगों की ओर ध्यान दें। याद रखें, अपने प्रधानमंत्री काल में श्री आई के गुजराल ने विदेशों में रॉ की नुकसानदेह गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। अब देखिए, कि हमने कैसे आतंक की नौका पर अवरोध पैदा किया और उनके शब्दों को सुना, “पाकिस्तान की ओर से मुंबई जैसा एक भी आक्रमण, और पाकिस्तान बलूचिस्तान से हाथ धो बैठेगा!” भारतीय होने के नाते ऐसे ही दृढ़ शब्दों को मैं भी सुनना चाहूँगा। हम प्हले आक्रमण कभी नहीं करेंगे, लेकिन अगर आप करते हैं, तो हम निश्चित रूप से अपना दूसरा गाल भी आगे नहीं करेंगे।
11. भारत ने उत्तर-पूर्व और भारत के चारों ओर चीन की सीमा पर बॉर्डर रोड को स्वीकृति दे दी है। याद रखें कि केवल चीन के विरोध के कारण एडीबी (आशियाँ डेवलपमेंट बैंक) ने यूपीए के शासन में हमें फंड नहीं दिया और यूपीए ने वह फ़ाइल “पर्यावरण मंत्रालय के नियंत्रण में रख दी थी – वह ‘जयंती टैक्स” तो याद ही होगा? हमारी सैन्य शक्ति पर पड़ने वाले कुप्रभावों के विषय में किसी ने भी नहीं सोचा।
12. भारत, यमन के युद्ध क्षेत्र में फँसे 4500 से भी अधिक भारतीयों को वापस लाने में सफल हुआ, और साथ ही 41 विभिन्न देशों के विदेशियों को मुक्त करवाने में सफल हुआ, जो आज उस अभियान के लिये भारत को सर्वोच्च दर्जा दे रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने सऊदी अरब के शासक सलमान से विशेष वार्ता की और उनसे उस क्षेत्र में भारतीय वायुसेना के हवाई जहाज़ों को उड़ने की अनुमति देने के लिये कहा। क्योंकि सऊदी अरब यमन पर आक्रमण कर रहा था, और यमन के आकाश को “नो-फ़्लाई ज़ोन’ घोषित कर दिया गया था। इसके परिणामस्वरूप हमें कुछ घंटों के लिये सुनिश्चित रूप से खुला आकाश मिला, और ज़रा सोचिये, इस सारी कार्यवाही की अगुवाई किसने की? अजित डोभाल, सुषमा स्वराज जी और जनरल वी के सिंह जी... तीनों ने व्यक्तिगत रूप से। आपने ऐसा कब आखिरी बार सुना था कि कोई मंत्री ऐसे किसी काम में व्यक्तिगत रुचि लेता है, जिसमें कई हज़ारों करोड रुपयों का फ़ायदा न नज़र आ रहा हो?? इस पर भी... ज़रा सोचिये, वे किस धर्म/सम्प्रदाय के लोग थे जिनको यूँ बचाया गया? लेकिन इस बात में किसी भी तरह की धर्म-निरपेक्षता नहीं होगी कि जिन लोगों को यमन से, या इससे पहले इराक़ से बचाया गया था, वे सभी हिन्दू तो बिलकुल नहीं थे।
13. भारत की वायु सेना दिनों दिन कमज़ोर हो रही थी, और यूपीए सरकार के पास कितनी ही सारी जानकारी होने के बावजूद वो उसी अवस्था में खुश थी। नमो ने फ़्रांस के साथ रैफेल फ़ाइटर जेट की डील पर पुनः कार्य आरंभ किया और शीघ्रातिशीघ्र 36 जेट लेकर आए। और ये सारे काम बिना किसी बिचौलिए के ज़रिये किये गए, तो फलस्वरूप, बिना कमीशन ही किये गये।
14. ऐसा 42 वर्षों के बाद हुआ कि किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने कनाडा की यात्रा किसी मीटिंग में सम्मिलित होने के लिये नहीं किया, बल्कि विशिष्ट राजकीय उद्देश्य के लिये की, और द्विपक्षीय समझौते में, भारत कनाडा को इस बात के लिये राज़ी कर सका कि अगले पाँच वर्ष तक कनाडा भारत को इसके न्यूक्लियर रिएक्टर के लिये यूरेनियम सप्लाई करेगा। इससे भारत की बिजली संबंधी समस्याओं को सुलझाने में बहुत अधिक सहायता मिलेगी।
15. कनाडा ने भारतीय पर्यटकों के लिये वीज़ा ऑन अराइवल को स्वीकृति दे दी है।
16. अभी हाल की ही बात है, जब हम न्यूक्लियर रिएक्टर रूस और अमेरिका से ही खरीदते चले आ रहे थे, और परिस्थिति कुछ लाचारी और भिक्षुक जैसी ही बनी हुई थी, क्योंकि उनको चिंता रहती कि कहीं हम किसी अन्य उद्देश्य के लिये न्यूक्लियर रिएक्टर का उपयोग न करें। तो, हमें केवल उतना और वही मिलता जो वो हमें देना चाहते... अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी फ़्रांस को इस बात के लिये राज़ी करने में सफल हुए कि अब फ़्रांस नवीनतम तकनीकी के साथ भारत में ही न्यूक्लियर रिएक्टर बनाएगा। जिसका निर्माण किसी भारतीय कम्पनी के सहयोग से किया जाएगा, और फलस्वरूप यह “मेक इन इण्डिया” की राह पर एक अच्छा कदम सिद्ध होगा।
17. गणतंत्र दिवस के दौरान राष्ट्रपति ओबामा के आने पर, नमो ने अमेरिका को इस बात के लिये राज़ी किया कि न्यूक्लियर ईंधन की ट्रैकिंग का नियम वापस ले लें, जिसके फलस्वरूप अब, अगले 16 न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रोजेक्ट के लिये रास्ता खुला है।
और भी कई उपलब्धिया है जो मे यहा लिख नहीं पाया हु ।अब आप ही बताये एक साल पहले का जो भारत था और आज का जो भारत है उसमे मोदी जी का क्या योगदान है ?? क्या उनकी इतने कम समय मे अर्जित की गई उपलब्धिया कम है ??

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