किसने इन्हे यह अधिकार दिया ??

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दाऊद की हामी के बाद मुंबई में टाइगर ने गुप्त बैठक की। इसमें दाऊद का भाई अनीस इब्राहिम भी शामिल हुआ। बैठक में पूरे मुंबई में बम प्लांट करने को लेकर योजना तैयार की गई। इसके लिए बड़े पैमाने पर विस्फोटक और हथियार की जरूरत थी। इसे मुहैया कराने के लिए दाऊद ने पाकिस्तानी की खुफिया एजेंसी आइएसआइ को तैयार किया। दाऊद ने कस्टम के कुछ अधिकारियों की मदद से पाकिस्तान से समुद्र के रास्ते बड़े पैमाने पर आरडीएक्स, हैंड ग्रिनेड, एके 47 व 56 राइफलें मुंबई पहुंचाए। कहा जाता है कि आरडीएक्स की इतनी मात्रा थी कि यह पूरे मुंबई को तबाह कर सकता था।
अब देखिये याकूब मेमन ने इस खुनी खेल में क्या क्या किया ? याकूब ने ही उन्नीस लडको को इसके लिए खोजा और तैयार किया ..... विस्फोटक कहाँ कहाँ रखने हैं उसके लिए उन सबको तैयार उसी ने किया ......इनकी फ्लाइट का टिकट याकूब ने अपने एक दोस्त की ट्रेवल एजेंसी से बुक करवाया। इस पूरी योजना लाखों रुपये खर्च होने थे। इसलिए मेमन परिवार के एचएसबीसी स्थित तीन खाते में दुबई से करीब 65 हजार डॉलर भेजे गए। इन तीनों खातों को याकूब ही ऑपरेट करता था।
इन लडको को ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेजा गया .. फिर जब ये लोग वापिस आये तो उसमे से एक लड़के ने बगावत कर दी और पुलिस के पास चला गया.. और सबकुछ बता दिया ... मगर ये भारतीय police थी जिसने इसे मजाक समझा ... और कोई एक्शन ही नहीं लिया .. . इन बातों की जानकारी टाइगर मेमन को लग गयी थी पर उसने सारा प्लान जस का तस रखा ..
दिन चुना गया जुमे का .. याने शुक्रवार का .. पूरी प्लानिंग यही थी की ठीक नमाज के वक़्त विस्फोट किये जाएँ ताकि नमाज पढने वाले मस्जिद में रह कर बच सकें .......
शुक्रवार ..... १२ मार्च .... फिर से याकूब ने ही 12 वाहनों का इंतजाम किया जिसमें चार मारुति 800, एक मारुति वैन, एक कमांडर जीप, दो मोटरसाइकिल, चार स्कूटर थे। और इससे ज्यादा एक बड़ा और माहिर आतंकवादी क्या करता है जो याकूब कर रहा था .. ?
घटना से एक दिन पहले यानि 11 मार्च को याकूब मेमन ने अपने परिवार के नौ सदस्यों के साथ दुबई भाग गया। और उसका भाई टाइगर मेमन विस्फोट से एक घंटे पहले दुबई के लिए उड़ान भर ली।..
12 मार्च 1993 को दोपहर 1:30 बजे बंबई स्टॉक एक्सचेंज के बेंसमेंट में पहला धमाका हुआ। इसमें लगभग 50 लोग मारे गए। दूसरा धमाका 2:15 बजे नरसी नाथ स्ट्रीट में हुआ जहां छह लोगों की मौत हुई। तीसरा धमाका 2:30 बजे शिव सेना भवन के बाहर हुआ जिसमें चार लोग मारे गए। चौथा धमाका 2:33 बजे एयर इंडिया बिल्डिंग में हुआ जहां 20 लोग मारे गए और 84 घायल हुए थे। पांचवा धमाका 2:45 बजे सेंचुरी बाजार के भी़डभाड़ वाले इलाके में हुआ जहां सबसे ज्यादा नुकसान हुआ। यहां 113 लोग मारे गए और 227 लोग घायल हुए थे। छठा धमाका ठीक 2:45 बजे माहिम में हुआ। सातवां धमाका 3:05 बजे झावेरी बाजार में, आठवां धमाका 3:10 बजे सी रॉक होटल में, नौवां धमाका 3:13 बजे प्लाजा सिनेमा में, दसवां धमाका 3:20 बजे जुहू सेंटूर होटल में, ग्यारवां धमाका 3:30 बजे सहार हवाई अड्डा पर (हथगोले फेंके गए), बारहवां धमाका 3:40 बजे एयरपोर्ट सेंटूर होटल में हुआ। इसके अलावा माहिम सेतु में मछुआरा कालोनी में भी ग्रेनेड फेंके गए थे।
दोस्तों ऐसे शातिर आतंकवादी को हमारे देश के 40 गण्यमान व्यक्ति ने माफीनामा पर दस्तखत कर बचाने की कोशिस की ।
अब आप ही बताये की क्या आपके आखों मे उन लोगो के परिवार वालों के लिए आसू नहीं आये, जरूर आये होगे । आतंकवाद का ना कोई धर्म होता है ना कोई जात । नुकसान पाहुचने वाले कोई हमदर्दी नहीं दिखते। क्या इन लोगो ने ऐसा करने से पहले कोई जनमत किया, क्या उन परिवार वालों से पूछा जो हिन्दू थे , मुसलमान थे, सिख थे, और ईसाई भी थे, ??
किसने इन्हे यह अधिकार दिया की दया याचिका पर अपने पद का अनुचित लाभ ले, किसने   ??

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